आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति और उसका सबसे बड़ा दुश्मन उसकी खुद की 'जीभ' (वाणी) है। आप जैसा बोलते हैं, वैसा ही आपका भविष्य बनता है। आइए जानते हैं वाणी और व्यवहार के गुप्त सूत्र।
1. वाणी की मधुरता ही आपका आभूषण है (কথার মধুরতা আপনার অলংকার)
आचार्य कहते हैं कि "वाणी में शहद जैसी मिठास होनी चाहिए, क्योंकि कड़वे शब्द बने-बनाए काम बिगाड़ देते हैं और दुश्मनी पैदा करते हैं।"
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আচার্য বলেছেন যে, "কথায় মধুরতা থাকা উচিত, কারণ তিক্ত কথা অনেক ভালো কাজও নষ্ট করে দেয় এবং শত্রুতা তৈরি করে।
2. सच कब और कैसे बोलना चाहिए? (সত্য কখন এবং কীভাবে বলতে হবে?)
चाणक्य नीति के अनुसार, "सच हमेशा मीठा होना चाहिए। ऐसा सच जो किसी के दिल को ठेस पहुँचाए या किसी को नुकसान दे, वैसा सच बोलने से मौन रहना बेहतर है।"
Bengali:
চাণক্য নীতি অনুসারে, "সত্য সবসময় মধুর হওয়া উচিত। এমন সত্য যা কারও মনকে আঘাত করে বা কারও ক্ষতি করে, তেমন সত্য বলার চেয়ে নীরব থাকাই শ্রেয়।
3. संकट के समय संयम (সংকটের সময় সংযম)
जब मुसीबत चारों तरफ से घेर ले, तो घबराना नहीं चाहिए। उस समय धैर्य (Sabr) और संयम ही आपका सबसे बड़ा हथियार है। शांत दिमाग ही आपको मुसीबत से बाहर निकाल सकता है।
Bengali- যখন বিপদ চারদিক থেকে ঘিরে ধরে, তখন আতঙ্কিত হওয়া উচিত নয়। সেই সময় ধৈর্য এবং সংযমই আপনার সবচেয়ে বড় অস্ত্র। শান্ত মস্তিষ্কই আপনাকে বিপদ থেকে বের করে আনতে পারে।
1 क्या आपकी एक कड़वी बात ने कभी आपका कोई रिश्ता या काम खराब किया है? (আপনার কি কোনো তিক্ত কথা কখনও আপনার কোনো সম্পর্ক বা কাজ নষ্ট করেছে?)
2 क्या आप मुसीबत के समय शांत रह पाते हैं? (আপনি কি বিপদের সময় শান্ত থাকতে পারেন?)
3 क्या सच हमेशा कड़वा होता है? चाणक्य की राय जानकर आप हैरान रह जाएंगे। (সত্য কি সবসময় তিক্ত হয়? চাণক্যের মত জেনে আপনি অবাক হবেন।)

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